By

प्रेस विज्ञप्ति
तत्काल जारी करने हेतु

दिनांक: 24 मार्च 2026

भगत सिंह के शहादत दिवस पर देशव्यापी प्रदर्शन, समान भारत की मांग बुलंद

23 मार्च (भगत सिंह के शहादत दिवस) से 14 अप्रैल (अंबेडकर जयंती) तक चलने वाले असमानता विरोधी अभियान की शुरुआत देश के विभिन्न हिस्सों में जन-कार्रवाइयों के साथ हुई। विभिन्न संगठनों द्वारा शुरू किए गए इन कार्यक्रमों में संपत्ति कर (वेल्थ टैक्स) लगाने और अमीरों व गरीबों के बीच बढ़ती खाई को कम करने की मांग गूंजती रही। ये कार्यक्रम “टैक्स द टॉप” अभियान के बैनर तले आयोजित किए गए।

23 मार्च को भगत सिंह के शहादत दिवस पर देशभर में सामूहिक कार्रवाई की एक मजबूत लहर देखने को मिली, जिसमें विभिन्न तबकों के लोग बढ़ती आर्थिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एकजुट हुए। दिल्ली से वाराणसी, बिजनौर से कोलकाता, और सीतापुर से पश्चिम सिंहभूम तक 9 राज्यों और  केंद्र शासित प्रदेशों में युवा, महिलाएं, किसान, मजदूर और बुजुर्ग एकजुट होकर सामने आए।

नेशनल हॉकर्स फेडरेशन के शक्तिमान घोष ने कहा, “यह वह भारत है जहां शीर्ष 1% अमीर आबादी राष्ट्रीय आय के 40% पर कब्जा रखती है, जबकि 80 करोड़ लोग सरकारी राशन पर निर्भर हैं। एक तरफ अंबानी जैसे सुपर अमीर हैं जो हर मिनट 1.5 करोड़ रुपये कमाते हैं, वहीं देश के 4 करोड़ रेहड़ी-पटरी वालों की पूरी जीवन भर की कमाई भी उनकी संपत्ति के सामने बहुत कम है।”

पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और मध्य प्रदेश के कई स्थानों पर ये कार्यक्रम आयोजित हुए। इनमें नेशनल हॉकर्स फेडरेशन; घरेलू कामगार यूनियन, दिल्ली; क्रांतिकारी मजदूर यूनियन, फतेहाबाद (हरियाणा); युवा प्रशिक्षण केंद्र, बिजनौर; समता युवा मंच और मनरेगा मजदूर यूनियन, उत्तर प्रदेश; मजदूर किसान शक्ति संगठन, राजस्थान; दलित बहुजन फ्रंट, तेलंगाना और संभावना इंस्टीट्यूट, हिमाचल प्रदेश शामिल थे।

23 मार्च से 14 अप्रैल तक देशभर के संगठन, समूह और नागरिक समाज ने “असमानता के खिलाफ खड़े हों” के आह्वान के साथ एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इनका मानना है कि मुट्ठीभर अति-धनाढ्यों पर कर लगाकर ही सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को सार्वभौमिक बनाया जा सकता है।

23 मार्च को संयुक्त कार्रवाई दिवस के रूप में मनाते हुए प्रतिभागियों ने भगत सिंह के समतामूलक समाज के सपने को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दिन जनसभाएं, चर्चाएं और जन-आंदोलन आयोजित किए गए, जिनमें बढ़ती आर्थिक और सामाजिक असमानताओं पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। संगठनों ने उन नीतियों के खिलाफ सड़कों पर विरोध जताया जो कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देती हैं और सामाजिक सुरक्षा व कल्याण योजनाओं में कटौती करती हैं। मजदूर किसान शक्ति संगठन के शंकर सिंह ने कहा, “अन्याय और असमानता के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची देशभक्ति है।”

सीतापुर, उत्तर प्रदेश में समता युवा दल की ऋचा सिंह ने कहा, “भगत सिंह के शहादत दिवस और राममनोहर लोहिया की जयंती के अवसर पर, ऐसे समय में जब देश गहरी असमानता का सामना कर रहा है, समतामूलक समाज के आदर्शों को फिर से स्थापित करना बेहद जरूरी है।”

भारत आज ऐसी भीषण आर्थिक असमानता का सामना कर रहा है जो औपनिवेशिक दौर की याद दिलाती है। सबसे अमीर 1% लोगों के पास देश की 40% से अधिक संपत्ति है। शीर्ष 10% के पास लगभग 60% राष्ट्रीय आय है, जबकि निचले 50% लोग केवल 15% आय पर जीवन यापन कर रहे हैं।

भारत में अरबपतियों की संख्या 1991 में 1 से बढ़कर 2025 तक 358 से अधिक हो गई है। आज केवल 1,688 लोगों के पास 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति है, जिनकी कुल संपत्ति 166 लाख करोड़ रुपये से अधिक है—जो भारत की जीडीपी का लगभग 50% है।

शहरी महिला घरेलू कामगार यूनियन की अनीता कपूर ने कहा, “हम उन घरेलू कामगारों के साथ काम करते हैं जिन्हें आज भी औपचारिक रूप से कामगार का दर्जा नहीं मिला है। यदि सुपर अमीरों पर मात्र 2% कर लगाया जाए, तो इससे पेंशन, मातृत्व लाभ और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाए जा सकते हैं।”

कोलकाता में न्यूटाउन डीएलएफ, साल्टलेक सेक्टर-5, साल्टलेक सिटी सेंटर, सियालदह स्टेशन और बौबाजार चौराहे सहित कई स्थानों पर सड़क प्रदर्शन आयोजित किए गए। साथ ही नेशनल हॉकर्स फेडरेशन द्वारा एक हॉल मीटिंग भी आयोजित की गई, जिसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की मजबूत भागीदारी देखने को मिली। नेशनल हॉकर्स फेडरेशन ने उदयपुर, उज्जैन और उधमपुर जैसे शहरों में देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें सुपर अमीरों पर तत्काल कर लगाने की मांग उठाई गई।

वाराणसी में मनरेगा मजदूर यूनियन द्वारा आयोजित “महिला मजदूर अधिकार सम्मेलन” में महिला कामगारों ने सर्वसम्मति से सुपर अमीरों पर अधिक कर लगाने की मांग का समर्थन किया और ₹800 प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी की मांग उठाई। पुलिस द्वारा कर्फ्यू का हवाला देकर कार्यक्रम रद्द करने की कोशिश के बावजूद, महिलाओं ने निर्भीक होकर कार्यक्रम पूरा किया। यह घटना दर्शाती है कि आर्थिक असमानता के साथ-साथ सामाजिक असमानता भी व्यापक है, जहां विशेषकर महिलाएं, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जातियां और अल्पसंख्यक समुदाय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से वंचित किए जाते हैं।

सीतापुर, उत्तर प्रदेश में समता युवा मंच द्वारा आयोजित “संकल्प यात्रा”—छात्रों और युवाओं का एक मार्च—शहर में समानता का संदेश लेकर निकला। इस मार्च में संविधान में निहित समानता के आदर्शों और भगत सिंह तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने असमानता कम करने के लिए अमीरों पर कर लगाने की मांग उठाई।

प्रतिरोध और उम्मीद की भावना को दोहराते हुए, देशभर के प्रतिभागियों ने न्याय और समानता पर आधारित भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। यह आह्वान व्यापक रूप से गूंजा: “भगत सिंह के शहादत दिवस पर आइए उनके अधूरे सपने को पूरा करें। गैरबराबरी के खिलाफ, बराबरी का बसंत लाएं।”

संयुक्त कार्रवाई दिवस देशभर में असमानता के खिलाफ बढ़ते जनसंकल्प और एक न्यायपूर्ण व समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम का प्रतीक है।

जारीकर्ता:
टैक्स द टॉप अभियान एवं सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी

संपर्क विवरण:
राज शेखर (+91 79859 46875)
raj@cenfa.org
अधिक जानकारी और तस्वीरों के लिए: https://taxthetop.org/

oplus_0

Partner With Us Through Your Support

Strong democracies need financial accountability.

Behind every policy is a financial choice. CFA works to make those choices transparent and just.

Your support enables CFA to research, monitor, and speak up on how public resources are used. Together, we can ensure finance serves the public good.

Support the work—support accountability.