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भारतीय बैंकिंग क्षेत्र एक लंबे और गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। बुरे ऋण बढ़ रहे हैं और बैंक घटते मुनाफे के साथ कम-पूंजीकृत हो रहे हैं। नतीजतन, साख वृद्धि थम सी गयी है, और बढ़ती बेरोजगारी, जिससे भारत परेशान है, पुनः स्थापित हो रहा है।
भाजपा सरकार और आरबीआई इस संकट से निपटने में पूरी तरह विफल रहे हैं। कंजूस एवं लालची कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ-साथ सरकार और आरबीआई भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बुरी हालत के लिए जिम्मेदार हैं। वास्तव में, बीजेपी सरकार और आरबीआई की ज्यादातर कार्रवाइयों ने न केवल बैंकिंग संकट को बढ़ावा दिया है, बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र को खुली छूट दे दी है जो अब इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत दवाब वाली संपत्तियों को नीलामी में सस्ते पर ले रहे हैं।

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