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विगत 8 और 9 दिसंबर को रायपुर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन का आयोजन जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम में 19 राज्यों के लगभग 350 प्रमुख स्वास्थ्य नेतृत्वकर्ता, एक्टिविस्ट्स, जनांदोलनों और सामुदायिक प्रतिनिधियों की भागीदारी थी सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य की चुनौतियों, स्वास्थ्य व्यवस्था में नीतिगत बदलावों की मांग और जमीनी स्तर पर जन स्वास्थ्य आंदोलन को रणनीतिक रूप से मजबूत करना था।
सम्मेलन की शुरुआत सरकारी प्राथमिकताओं और निजीकरण के बढ़ते खतरे पर ज़ोर दिया गया। हाल ही में नीति आयोग के एक आदेश को लेकर खास चिंता जताई गई, जिसमें जिला अस्पतालों के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को बढ़ावा दिया गया है। प्रतिभागियों ने चिंता जताई कि इससे देश की सबसे कमजोर आबादी के लिए स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी। मुख्य वक्ता सामुदायिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रितु प्रिया ने सरकारी नजरिए में बड़े बदलाव की मांग की है। उन्होंने कहा कि “बहुत लंबे समय से, स्वास्थ्य के बारे में हमारी समझ सिर्फ डाक्टरों और अस्पतालों तक ही सीमित रही है।” हमें समुदाय के तरीकों, पारंपरिक ज्ञान और हमारी आधी आबादी की सेवा करने वाले इनफॉर्मल डॉक्टरों की ताकत को वैलिडेट और इंटीग्रेट करना होगा। एक अच्छा स्वस्थ्य समाज जमीन से बनता है, ऊपर से नीचे थोपा नहीं जाता। उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से, और खासकर 1990 के दशक से, नवउदारवाद नितियों ने व्यवस्थित तरीके से पब्लिक हेल्थ सिस्टम को कमज़ोर किया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि मौजूदा सरकार मेडिकल एजुकेशन, सर्विसेस, इक्विपमेंट और मेडिसिन को प्राइवेटाइज करने का एजेंडा बन गया है, जिससे हेल्थकेयर असल में अधिकार के बजाय एक बाजार बन गया है।
अन्तर्राष्ट्रीय ग्रीन नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रफुल्ल सामंत्रा ने कहा कि”हमारी सरकार से मौजूदा नितियों पर सिर्फ असहमति नहीं है, बल्कि उस संवैधानिक ताने-बाने पर हमला है जो बराबरी का वादा करता ,उसको खत्म किया जाना भी चिंता का मुख्य कारण है। सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को निजी मुनाफे के लिए पूंजीपतियों को दे रही है और आयुष्मान कार्ड जैसी पॉलिसी मरीजों से ज़्यादा कॉर्पोरेट के फ़ायदे में काम आ रही है।”
सम्मेलन के दौरान उठाए गए मुख्य मुद्दों में स्वास्थ्य के लिए सरकारी आवंटन जीडीपी के 1.5 प्रतिशत से भी कम है, जो तय 2.5 प्रतिशत से बहुत कम है। हेल्थ इंश्योरेंस मॉडल, पर्यावरणीय और जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण, स्वास्थ्य और वंचित समुदाय, महिला हिंसा आदि मुद्दों पर भी प्रमुखता से चर्चा किया गया। किसान नेता डाक्टर सुनिलम ने कहा कि स्वास्थ्य हमारे भोजन पर बहुत पर निर्भर करता है, जो आज मिलावट और जेनेटिक मोडिफाइड उत्पादन के कारण जहरीला हो गया है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने कहा कि किसी बङी विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन करने के लिए कानूनी प्रावधान है।उसी तरह विकास परियोजनाओं से स्वास्थ्य पर पङने वाले प्रभावों का आकलन करने कानूनी प्रावधान किया जाना चाहिए।


प्रमुख घोषणाएं और निर्णय

  • व्यवसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक पखवाड़ा का अभियान अप्रैल 2026 में मनाया जाएगा।
  • व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन जयपुर में आयोजित किया जाएगा।
  • स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ और सार्वजनिक स्वास्थ्य की मजबूती के लिए राष्ट्रीय अभियान चलाया जाएगा।
  • जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य के विभिन्न मुद्दों पर आधारित एक 7 दिवसीय कोर्स की शुरूआत मार्च 2026 से किया जाएगा।जिसका उद्देश्य देश के 100 जिलों में मजबूत स्वास्थ्य कार्यकर्ता तैयार करना है ।
  • महिला हिंसा और स्वास्थ्य तथा वंचित समुदायों के स्वास्थ्य के मुद्दों पर पृथक समूह का निर्माण किया जाएगा।

दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में एक जन स्वास्थ्य घोषणा पत्र जारी किया गया। जिसमें जन स्वास्थ्य के मुद्दों को समर्थन के सक्रिय रूप से जमीनी और राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया गया।
इस सम्मेलन में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया की राष्ट्रीय नवीनीकरण का गठन कर राष्ट्रीय और राज्य कन्वेनर भी बनाए गए और एक राष्ट्रीय सलाहकार समूह का भी गठन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और दवाओं के मुद्दों पर आधारित पुस्तकों का प्रकाशन भी किया गया। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विषय विशेषज्ञों अमितावा गुहा, राजस्थान के कैलाश मीना, जन संघर्ष मोर्चा मंडला से विवेक पवार, चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के दादु लाल कुङापे एवं मीरा बाई मरावी, सिलिकोसिस पीड़ित संघ अलिराजपुर से दिनेश रायसिंग, चुन्नी आदि ने भी विभिन्न सत्रों में अपने अनुभव साझा किए।


राज कुमार सिन्हा | बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ

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