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सहारा इंडिया पैरा बैंकिंग शाखा सीधी द्वारा निवेशकों का पैसा हड़पने का पूरा षड्यंत्र रचा गया है। सहारा इंडिया शाखा सीधी के शाखा प्रबंधक की साजिश धोखाधड़ी के इस खेल के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही नहीं की जाएगी तो निवेशकों का पैसा डूब जाएगा। वैसे तो सहारा की बुनियाद ही गड़बड़ झाले पर रखी गई है सहारा ने देश भर में लाखों छोटे निवेशकों से हजारों हजार करोड़ रुपए की रकम जमा कराई गई है जिसे वापस नही किया जा रहा है। इसी तरह सहारा इंडिया शाखा सीधी में भी हजारों निवेशकों से पैसा जमा कराया गया है। ठेले वाले, गोमती वाले, दैनिक मजदूरी करने वाले, छोटे किसान, छोटे व्यापारी, मिस्त्री, ड्राइवर, कारीगरों ने दैनिक, मासिक जमा योजना के साथ फिक्स डिपांजीट के रूप में अपनी गाढी कमाई से पैसा जमा कर अपने बड़े काम जैसे लड़की की शादी, मकान निर्माण आदि का सपना संजोए थे। योजना अनुसार जमा राशि की रसीद, पासबुक, बॉन्ड निवेशकों के पास मौजूद हैं। सहारा हाउसिंग सोसायटी सीधी ने निवेशकों को उनकी निवेशित रकम को कई गुना बढ़ाकर और उन्हें जमीन तथा प्लाट देने का लालच देकर वर्ष 2007-8 में “अबोध बांड” नाम से पैसा जमा कराया गया था और 6 वर्ष में दोगुना देने का वादा किया गया था अवधि पूर्ण होने पर “अबोध बांड़” की राशि कि मैचोरटी न देकर बांड़ की राशि को “क्यूंसाँप योजना” में कन्वर्ट कर दिया गया और कहा गया कि 6 वर्ष बाद ढाई गुना पैसा दिया जाएगा। 6 वर्ष पूर्ण होने पर निवेशकों का पैसा वापस न देकर दबाव बनाया जाता है कि अब “स्टार मल्टीपरपज सोसायटी” में जमा राशि को 3 या 6 वर्ष के लिए परिवर्तित करो तब ही पैसा दिया जाएगा। कागजी खेल की चकर घिन्नी में निवेशक अपना पैसा वापस पाने सहार इंडिया का चक्कर काट रहे है।
इसी तरह “सहारा को ऑपरेटिव सोसाइटी” और “सहारा क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी” लिमिटेड बनाकर निवेशकों से पैसा जमा कराया गया है। इस योजना की भी समय अवधि पूर्ण होने के बाद सहारा इंडिया शाखा सीधी के शाखा प्रबंधक निवेशकों का पैसा वापस न देकर बार-बार टरकाया जाता है साथ ही उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया जाता है। अभी भी नए एवं पुराने निवेशकों से सोची समझी साजिश के तहत शाखा प्रबंधक,कर्मचारियों और एजेंटों के द्वारा राशि जमा कराकर निवेशकों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। जिला मुख्यालय में स्थित सहारा इंडिया द्वारा प्रशासन के नाक में खड़े होकर की जा रही ठगी, लूट एवं धोखाधड़ी चिंतनीय है। मामले की उच्चस्तरीय जांच करा कर दोषी शाखा प्रबंधक और अन्य दोषियों के विरुद्ध पुलिस में आपराधिक प्रकरण कायम किया जाय तथा गरीब एवं छोटे निवेशकों का जमा पैसा वापस कराया जाय।

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