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सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी दिल्ली में स्थित एक संस्था है, जो भारत में वित्तीय जवाबदेही को मज़बूत करने और इसे बेहतर करने के लिये काम करती है। सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप 2021 के लिए आवेदन आमंत्रित करती है।

2018 में शुरू की गयी इस फ़ेलोशिप का उद्देश्य, युवा लेखकों को समीक्षात्मक रूप से ऋण और ’विकास’ से परे विकास वित्त की दुनिया को देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस साल हम दस फ़ेलोशिप प्रदान करेंगे, जिसमें प्रत्येक फ़ेलो को 25,000 रुपये की फ़ेलोशिप राशि दी जायेगी। यहाँ फ़ेलोशिप के बारे में अधिक जानकारी देखें।

फेलोशिप अगस्त 2021 में तीन महीने की अवधि के लिए शुरू होती है, जिसमें नीचे उल्लिखित विषयों से संबंधित विशिष्ट क्षेत्र / परियोजनाओं पर व्यापक, गहन-शोध के साथ इनवेस्टिगेटिव लेख, फोटो निबंध या लघु फिल्म बनाना शामिल है।

प्रस्तावित विषय:

  1. सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र की लागत और परिणामों को देखते हुए, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को मज़बूत करने के बजाय कोविड महामारी के दौरान टीकों के लिए सरकार को निजी क्षेत्र पर निर्भर होना पड़ा, और साथ ही महानगरों में स्थित कुछ निजी अस्पतालों ने अधिकांश टीकों को हड़प लिया।
  2. महामारी, सार्वजनिक वित्त और सार्वजनिक स्वास्थ्य: सार्वजनिक वित्त और सार्वजनिक स्वास्थ्य, जिसमें सरकार की टीकाकरण नीति, सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च, राज्यों को सहायता, वैक्सीन रोलआउट, इत्यादि शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं है। “इस वर्ष वैक्सीन ‘सबसे महत्वपूर्ण’ आर्थिक नीति होगी,” आईएमएफ प्रमुख के द्वारा कहा गया।
  3. ऊर्जा निष्कर्षण और नवीकरणीय ऊर्जा: भारत में ऊर्जा निष्कर्षण और नवीकरण की स्थिति, पर्यावरण, समुदायों और वित्त पर इसका प्रभाव, जिसमें बिजली वितरण कंपनियों, सौर, कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा इत्यादि का निजीकरण शामिल है, लेकिन बस इन्हीं तक सीमित नहीं।
  4. इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस: इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस जिसमें लीनियर प्रोजेक्ट्स, मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनायें जैसे कॉरिडोर, नदी जोड़ परियोजना, तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर, संरक्षित क्षेत्रों में विकास के मुद्दे शामिल हैं।
  5. महामारी से निपटने के लिए राज्य की तैयारी और क्षमता: क्या राज्यों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने, जीएसटी का सही हिस्सा देने और संघीय राजकोषीयता को मज़बूत करने के माध्यम से महामारी से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार और सक्षम किया गया था?
  6. अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कदम: क्या सरकार द्वारा किए गये प्रयास, जिसमें कई प्रोत्साहन पैकेज शामिल हैं, आज न्यूनतम स्तर पर जूझते अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त हैं?

यह फ़ेलोशिप 40 वर्ष से कम आयु के सभी भारतीय नागरिकों के लिये, ऊपर दिये गये विषयों पर, अंग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाओं के लेखकों के लिए उपलब्ध है।

आवेदन के लिये आवश्यकतायें:

कृपया इस फॉर्म के माध्यम से अपना आवेदन जमा करें।

एक से अधिक विषयों पर प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं।

यदि आवेदन न्यूनतम मानक पर खरे नहीं उतरते हैं तो सी.एफ.ए. के पास फ़ेलोशिप नहीं प्रदान करने का अधिकार है ।

अपेक्षित काम:

  • फेलोशिप के अंत तक प्रस्तावित विषय पर 1500-2000 शब्दों का एक व्यापक विश्लेषणात्मक लेख।
  • फेलोशिप पूरा होने के बाद सी.एफ.ए. को दिये गये विषय पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
  • फेलोशिप प्राप्त करने वालों लेखकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने लेख प्रकाशित करवाएं।

गाइड (मेंटर):

चयनित फेलो साथियों को वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान द्वारा गाइड किया जायेगा। वर्तमान में वो सर्वोदय प्रेस सेवा के संपादक हैं; उन्होंने दैनिक भास्कर, तहलका और अन्य प्रकाशनों में वरिष्ठ पदों पर काम किया है।

पात्रता:

  • ये फेलोशिप सभी के लिये उपलब्ध है।
  • महिलाओं एवं क्षेत्रीय भाषाओं के लेखकों/शोधकर्ताओं को आवेदन भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

महत्वपूर्ण तारीखें:

आवेदन भेजने की अंतिम तारीख: 20 जुलाई, 2021  

चयनित फेलोशिप की घोषणा: 31 जुलाई, 2021

कॉपीराइट:

  • काम का सारा कॉपीराइट लेखकों के पास रहेगा । हालांकि, लेखक को उचित क्रेडिट देने के बाद, सी.एफ.ए. को काम का अनुवाद करने और प्रकाशित करने का अधिकार है।
  • दिल्ली में एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भाग लेने के लिये फेलो की आवश्यकता हो सकती है।

संगठन के बारे में:

सेंटर फॉर फ़ाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी (सी.एफ.ए.) भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वित्तीय संस्थानों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण, मॉनिटरिंग और प्रत्यालोचना करने और वित्तीय संस्थानों का विकास, मानवाधिकारों और पर्यावरण पर प्रभाव से जुड़े मुद्दों पर काम करती है।

सी.एफ.ए. विभिन्न सिविल सोसाइटी समूहों, सामाजिक आंदोलनों और सामुदायिक समूहों के साथ मिलकर काम करते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि वित्तीय संस्थान उन लोगों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह रहें, जिनका अस्तित्व उनकी सेवा करने के लिये है। हालांकि, हम दक्षिण एशिया क्षेत्र को भी देखते हैं और इक्कीसवीं सदी में अंतरराष्ट्रीय वित्त के वैश्विक स्वरूप को देखते हुए एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जोड़ते हुए चिंतन करना चाहते हैं। सी.एफ.ए. के बारे में और अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है

स्मितु कोठारी के बारे में:

स्मितु कोठारी एक प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् और विद्वान-कार्यकर्ता थे, जो पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकारों के मुद्दों से जुड़े हुए थे। अपने पूरे जीवन के दौरान, उन्होंने सामूहिक रूप से एक राष्ट्रीय और वैश्विक विकल्प बनाने की कोशिश की, जो सामाजिक रूप से न्यायसंगत और पारिस्थितिक रूप से अनुकूल हो।

भौतिकी, संचार और समाजशास्त्र में प्रशिक्षित, कोठारी ने अमेरिका में कॉर्नेल और प्रिंसटन विश्वविद्यालयों में पढ़ाया। वह ‘द इकोलॉजिस्ट एंड डेवलपमेंट’ के एक ‘कंट्रीब्यूटिंग एडिटर’ भी थे। एक विपुल लेखक और संपादक के रूप में, उन्होंने समकालीन आर्थिक और सांस्कृतिक विकास, विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण, विकासात्मक विस्थापन और सामाजिक आंदोलनों के प्रत्यालोचना पर विस्तार से लिखा। उनके द्वारा संपादित कुछ पुस्तकें हैं:  वॉइसेस ऑफ स्ट्रगल: सोशल मूवमेंट इन एशिया (2006); वॉइसेस ऑफ सैनटी, इन सर्च ऑफ डेमोक्रेटिक स्पेस (2002); ए वाटरशेड इन ग्लोबल गवर्नेंस? एन इंडिपेंडेंट असेसमेंट ऑफ़ द वर्ल्ड कमीशन ऑनडैम्स; द वैल्यू ऑफ़ नेचर: इकोलॉजिकल पॉलिटिक्स इन इंडिया (2003); आउट ऑफ़ द न्यूक्लियर शैडो (ज़ियामियां के साथ, 2001); रीथिंकिंग ह्यूमन राइट्स: चैलेंजेस फॉर थ्योरी एंड एक्शन (1991); दनॉन–पार्टी पोलिटिकल प्रोसेस: अनसर्टेन अल्टेरनेटिव्स (एच. सेठी के साथ, 1988)।

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