भारत के वित्तीय संस्थानों में पर्यावरण और सामाजिक जवाबदेही नीतियों की आवश्यकता

ज़्यादातर देशों द्वारा बड़े स्तर की विकास परियोजनाओं को आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अपरिहार्य माना जाता है। यह दृष्टिकोण भारत में भी अधिक मान्य है।

फिर से नोटेबंदी का वार | हमारा पैसा हमारा हिसाब

किसी देश की करेंसी या मुद्रा बस विनिमय का माध्यम नहीं बल्कि उसकी विश्वसनीयता और आर्थिक मज़बूती को भी बयां करती है। लेकिन हमारी सरकार ने एक बार फिर से इनके साथ खिलवाड़ किया।...