ஆற்றல் மாற்றத்தை மறுபரிசீலனை செய்தல்

சமத்துவ மற்றும் நியாயமான வளர்ச்சியை எதிர்கொள்ள சவால்கள் மற்றும் வாய்ப்புகள் நிலக்கரி, கச்சா எண்ணெய் மற்றும் இயற்கை ஏரிவாயு பயன் படுத்துவதால் உலகளவில் காலநிலை மாற்றம் ஏற்படுகிறது. உலகளவில் இதனால் 75% கிரீன்ஹவுஸ் வாயு (greenhouse gas )மற்றும் 90% கார்போன் டை ஆக்சைடு (Carbon -di...

ઉર્જા પરિવર્તન પર પુન:ર્વિચાર

ન્યાયપૂર્ણ અને સમાવેશી ભવિષ્ય માટેના પડકારો અને તકો અશ્મિભૂત ઇંધણ—કોલસો, તેલ અને ગેસ—વૈશ્વિક આબોહવા પરિવર્તનમાં સૌથી મોટુ યોગદાન આપે છે, જે વિશ્વભરમાં 75% કરતાં વધુ ગ્રીનહાઉસ ગેસ ઉત્સર્જન અને તમામ કાર્બન ડાયોક્સાઈડ ઉત્સર્જનના લગભગ...

ऊर्जा परिवर्तन पर पुनर्विचार

कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन का वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन में सबसे बड़ा योगदान है। वे दुनिया भर में 75% से अधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और लगभग 90% कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन...

कोयले की शक्ति : अक्षय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद उत्तर
प्रदेश में कोयला आधारित 1600 मेगावाट पावर प्लांट को मंजूरी

भारत का लक्ष्य 2022 तक अक्षय ऊर्जा यानी रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा या नवीकरणीय ऊर्जा के उदाहरण हैं – बायोगैस, बायोमास, सौर ऊर्जा इत्यादि.) से 175 गीगावॉट बिजली उत्पादन करने का था।

ऊर्जा और शहरी विस्तार के नए विकल्पों की जरुरत

र्मल पावर प्लांट, कोयला सम्बंधित सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों और ऊर्जा परिदृश्य पर समुदाय स्तरीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन नागपुर के सिविल लाइन स्थित एमएलए हाउस (हॉस्टल), कॉन्फ्रेंस हॉल, में दिनांक 11-12 सितंबर...

झाबुआ थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा

मध्य प्रदेश के गोरखपुर गांव में स्थित झाबुआ थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख आम लोगों के जीवन में जहर घोल रही है। क्षेत्र में विकास और रोजगार का वादा करने वाला यह...